चार Fortuner खरीदने के बाद चर्चा में आए बलरामपुर के धीरेंद्र प्रताप सिंह, सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें
बलरामपुर के धीरेंद्र प्रताप सिंह चार Fortuner गाड़ियां खरीदने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। जानिए उनके राजनीतिक सफर, संपत्ति और गाड़ियों से जुड़े विवाद के बारे में।

भाजपा के बलरामपुर Municipal Corporation के President Dhirendra Pratap Singh का नाम आजकल सोशल मीडिया पर काफी चर्चे में है, क्योंकि दो दिन पहले उन्होंने चार Fortuner गाड़ियां खरीदी हैं। Doctor Dhirendra Pratap Singh के नाम से भी जाने जाने वाले धीरेंद्र प्रताप सिंह को लोग धीरू के नाम से भी जानते हैं।
धीरेंद्र प्रताप सिंह भारत के उत्तर प्रदेश की 15वीं विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक करियर 2007 में शुरू किया था, जब 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा की ओर से बलरामपुर जिले के बलरामपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।
इनकी धर्मपत्नी, श्रीमती सविता सिंह गौड़ा ने भी 2010 में बलरामपुर से विधान परिषद सदस्य (MLC) का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। वह 2010 से 2016 तक इस पद पर रहीं।
इसके बाद बलरामपुर सदर विधानसभा सीट आरक्षित हो जाने के कारण धीरू प्रताप सिंह ने बगल की विधानसभा सीट उतरौला से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार वह मात्र 460 वोटों से चुनाव हार गए। पर इसका मतलब यह नहीं है कि उनका पुराना रुतबा खत्म हो गया। उनका पुराना रुतबा आज भी जारी है। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रदेश महासचिव हैं और श्रावस्ती लोकसभा सीट से 2024 के चुनाव की तैयारी में जुटे थे। आजकल उन्होंने भाजपा की तरफ अपना रुख मोड़ लिया है और भाजपा के आदर्श नगर पालिका परिषद, बलरामपुर के अध्यक्ष हैं।
नई Fortuner खरीदने की तस्वीरें और वीडियो उन्होंने खुद अपने Facebook प्रोफाइल पर डाले थे, जिन्हें अब उन्होंने डिलीट कर दिया है। विवाद होने के बाद उन्होंने इन तस्वीरों और वीडियो को हटा दिया।
लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने तब तक उन तस्वीरों और वीडियो को डाउनलोड करके अपनी प्रोफाइल पर डाल दिया था। इसलिए उनके कुछ अंश अभी भी आपको सोशल मीडिया पर देखने को मिल जाएंगे।
कुछ लोग कह रहे हैं कि धीरेंद्र प्रताप सिंह पहले से ही काफी अमीर थे और ये पैसे तथा गाड़ियां उन्होंने अपने निजी पैसों से खरीदी हैं। हालांकि, यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है कि एक पॉलिटिशियन अपने पैसों से भी कोई गाड़ी खरीदेगा। अब इसमें सवाल यह उठता है कि भाजपा एक तरफ तो भ्रष्टाचार न करने की सलाह देती है और लोगों को इसके बारे में बताती है, लेकिन उसके खुद के कार्यकर्ता इस तरह की गाड़ियां लेकर समाज को क्या संदेश देते हैं?
हालांकि, यह बात भी जानने वाली है कि Municipal Council, जैसे कि आदर्श नगर पालिका परिषद, जो बलरामपुर, उत्तर प्रदेश में है, वह Central Lokpal के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है। लोकपाल केवल केंद्र सरकार के स्तर के पदाधिकारियों और संस्थाओं के अंतर्गत आने वाले मामलों को देखता है। इसमें स्थानीय निकाय शामिल नहीं होते हैं। स्थानीय निकाय उस राज्य के लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उत्तर प्रदेश में भी लोकायुक्त के दायरे में नगर पालिका अध्यक्ष और राज्य सरकार के अधीन अधिसूचित स्थानीय प्राधिकरण आते हैं।
